शराब के समुद्र पर मुज़फ़्फ़रपुर
बेला से बरामद शराब के साथ तस्कर शराबबंदी में लड़खड़ा रहे शहर के कदम शराबबंदी ने कैसे एक समानांतर अर्थव्यवस्था को जन्म दिया है, इसे मुजफ्फरपुर में देखा जा सकता है। जो शराब पहले सरकारी ठेके पर एक हजार में मिलती थी, वह अब फ़ोन करने पर लोगों के घर पर 1500 सौ में पहुंचा दिया जाता है। ये जो पांच सौ ऊपर से लगते हैं, उसमें पूंजी लगाने वाले का ब्याज, परिवहन खर्च, डिलीवरी बॉय का हिस्सा व संबंधित थाना क्षेत्र का हिस्सा शामिल होता है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि राज्य सरकार को शराब कारोबार से 500 करोड़ का टैक्स आता था। विशेषज्ञों के मुताबिक अब यह करीब 1500 करोड़ की आय वाला व्यवसाय हो चुका है। फर्क यही है कि यह टैक्स सरकार के खजाने में न जाकर, पूंजीपति, कारोबारी, डिलीवरी बॉय, वाहन मालिक व पुलिस के बीच बंट जाता है। मुजफ्फरपुर से जानें शराबबंदी का हाल शराबबंदी एक अप्रैल 2016 से लागू की गई। 10 दिसंबर 2020 को मुजफ्फरपुर पुलिस ने चार साल का आंकड़ा जारी किया। इसके अनुसार इन चार सालों में जिले में 102561.683 यानी करीब एक लाख लीटर देशी शराब बरामद किए, वहीं इसी अवधि में जिले में 793...