BLAZING THOUGHTS
स्वतंत्रता सेनानी ब्रजनंदन बाबू व धर्मपत्नी मुज़फ़्फ़रपुर के साहेबगंज प्रखंड में एक गांव है, परसौनी। यहां के एक स्वतंत्रता सेनानी थे, ब्रजनंदन प्रसाद सिंह। इस खांटी कांग्रेसी भूमिहार परिवार ने तीन ऐसे रत्न दिए, जिन्होंने अपने बुजुर्गों से अलग सोच विकसित किया, उसे जिया और फैलाया। ये सोच थी समाजवाद, वामपंथ व नक्सलवाद। ये तीन रत्न आज हमारी धरोहर हैं, जो कल नहीं रहेंगे, पर अगली पीढ़ी उन्हें शिद्दत से याद करने को मजबूर होगी। एक खांटी कांग्रेसी परिवार में इस तरह तीन अलग अलग विचार का पलना, बढ़ना आपको आश्चर्यचकित कर देगा। पहले मुज़फ़्फ़रपुर के इन तीन भाइयों का नाम जान लें। सबसे बड़े भाई हैं डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा। पिता कांग्रेसी और आप समाजवाद के आज के बचे सबसे बडे स्तंभ। दूसरे भाई हैं डॉ. प्रभाकर सिन्हा। रिटायर आरडीएस कॉलेज प्राध्यापक व वाममार्गी। आप लोगों की राजनीतिक, आर्थिक स्वतंत्रता के सबसे बड़े पैरोकार में से हैं और जयप्रकाश नारायण द्वारा गठित प्रख्यात संगठन पीयूसीएल यानी पीपल यूनियन फ़ॉर सिविल लिबर्टी के नेशनल प्रेसिडेंट रह चुके हैं। इस कांग्रेसी परिवार के सबसे छोटे रत्न हैं अरबिंद कुमार सिन्हा। नक्...